कॉक्लियर इम्प्लांट कैसे काम करता है? 🎧
- Lovedeep Kholia

- 3 दिन पहले
- 2 मिनट पठन

कॉक्लियर इम्प्लांट सुनने की तकनीक में सबसे अद्भुत खोजों में से एक है। सामान्य हियरिंग एड केवल ध्वनि को तेज़ करते हैं, जबकि कॉक्लियर इम्प्लांट कान के क्षतिग्रस्त हिस्सों को बायपास करके सीधे श्रवण तंत्रिका (auditory nerve) को उत्तेजित करते हैं। इससे गंभीर या गहन श्रवण हानि वाले व्यक्ति ध्वनियों को महसूस कर सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह कैसे काम करता है।
🧩 कॉक्लियर इम्प्लांट के मुख्य भाग
कॉक्लियर इम्प्लांट दो हिस्सों में बंटा होता है:
बाहरी हिस्सा (कान के पीछे पहना जाता है):
माइक्रोफोन – वातावरण से ध्वनि को पकड़ता है।
स्पीच प्रोसेसर – ध्वनि को डिजिटल सिग्नल में बदलता है।
ट्रांसमीटर कॉइल – सिग्नल को त्वचा के पार आंतरिक हिस्से तक भेजता है।
आंतरिक हिस्सा (सर्जरी द्वारा त्वचा के नीचे लगाया जाता है):
रिसीवर/स्टिम्युलेटर – ट्रांसमीटर से सिग्नल प्राप्त करता है।
इलेक्ट्रोड एरे – कॉक्लिया (घोंघे के आकार का आंतरिक कान) में लगाया जाता है और श्रवण तंत्रिका को उत्तेजित करता है।

🔄 चरण-दर-चरण प्रक्रिया
ध्वनि कॉक्लियर इम्प्लांट सिस्टम से इस प्रकार गुजरती है:
ध्वनि पकड़ना – माइक्रोफोन बोलचाल, संगीत या वातावरण की आवाज़ को पकड़ता है।
सिग्नल प्रोसेसिंग – स्पीच प्रोसेसर ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदलता है।
सिग्नल ट्रांसमिशन – ट्रांसमीटर कॉइल सिग्नल को त्वचा के नीचे लगे रिसीवर तक भेजता है।
विद्युत उत्तेजना – रिसीवर सिग्नल को इलेक्ट्रोड एरे तक पहुँचाता है।
श्रवण तंत्रिका सक्रियण – इलेक्ट्रोड सीधे श्रवण तंत्रिका को उत्तेजित करते हैं।
मस्तिष्क द्वारा व्याख्या – मस्तिष्क इन संकेतों को ध्वनि के रूप में पहचानता है।
🌟 ध्यान देने योग्य बातें
कॉक्लियर इम्प्लांट प्राकृतिक सुनने की क्षमता वापस नहीं लाते, बल्कि ध्वनि को महसूस करने का नया तरीका प्रदान करते हैं।
सफलता उम्र, बहरापन की अवधि और श्रवण प्रशिक्षण पर निर्भर करती है।
बच्चे और वयस्क दोनों लाभ उठा सकते हैं, अक्सर वे बोलचाल समझने और रोज़मर्रा की आवाज़ों का आनंद लेने लगते हैं।
✨ इसका महत्व
कॉक्लियर इम्प्लांट गंभीर श्रवण हानि वाले लोगों के लिए संवाद, शिक्षा और सामाजिक अवसरों के द्वार खोलते हैं। यह केवल एक चिकित्सा उपकरण नहीं, बल्कि जुड़ाव और समावेशन का पुल है।




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