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भारत में ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप हेतु वित्तीय योजना कैसे करें

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ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention) बेहद महत्वपूर्ण है। स्पीच थेरेपी, ऑक्युपेशनल थेरेपी जैसी सेवाएँ बच्चों के विकास में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। लेकिन ये थेरेपी लंबे समय तक चलती हैं और खर्चीली भी होती हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए सही वित्तीय योजना बनाना ज़रूरी है।


क्यों ज़रूरी है वित्तीय योजना

  • लंबी अवधि की थेरेपी: बच्चों को कई सालों तक लगातार थेरेपी की ज़रूरत पड़ सकती है।

  • खर्च का बोझ: मासिक खर्च ₹30,000–₹80,000 तक हो सकता है।

  • मानसिक शांति: एक व्यवस्थित योजना से माता-पिता बिना तनाव के बच्चे की देखभाल कर सकते हैं।


भारत में उपलब्ध सरकारी योजनाएँ

1. विकलांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificate)

  • सरकारी अस्पतालों से जारी किया जाता है।

  • ऑटिज़्म को Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 में मान्यता दी गई है।

  • इससे शिक्षा, यात्रा और टैक्स में छूट मिलती है।


2. नेशनल ट्रस्ट योजनाएँ

  • निरामया स्वास्थ्य बीमा योजना: थेरेपी और मेडिकल खर्चों के लिए सस्ती बीमा सुविधा।

  • DISHA योजना: 10 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप और विशेष शिक्षा।

  • समर्थ योजना: रेस्पाइट और रेज़िडेंशियल केयर।

  • सहयोगी योजना: केयरगिवर ट्रेनिंग।

  • ज्ञान प्रभा योजना: उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए छात्रवृत्ति।


3. आयकर लाभ

  • धारा 80DD: विकलांग आश्रित बच्चों की चिकित्सा और पुनर्वास पर खर्च के लिए टैक्स छूट।

  • धारा 80U: विकलांग व्यक्ति के लिए टैक्स छूट।


4. शैक्षिक सहायता

  • समावेशी शिक्षा (Sarva Shiksha Abhiyan): सामान्य स्कूलों में संसाधन शिक्षक और सहायक।

  • छात्रवृत्ति: स्कूल और कॉलेज शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता।


5. अन्य लाभ

  • यात्रा रियायतें: रेल और बस किराए में छूट।

  • नौकरी और उच्च शिक्षा में आरक्षण: 4% आरक्षण ऑटिज़्म सहित विकलांग बच्चों के लिए।


माता-पिता के लिए वित्तीय योजना रणनीतियाँ


1. बीमा योजनाओं की समीक्षा करें

  • देखें कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी थेरेपी और OPD खर्च को कवर करती है या नहीं।

  • निरामया जैसी विशेष योजनाओं का लाभ उठाएँ।


2. बचत योजना बनाएँ

  • हर महीने थेरेपी खर्च के लिए निश्चित राशि अलग रखें।

  • SIP (Systematic Investment Plan) या Recurring Deposit का उपयोग करें।

  • आपातकालीन फंड तैयार रखें।


3. लंबी अवधि की सुरक्षा

  • Special Needs Trust बनवाएँ ताकि बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे।

  • Life Insurance लें जिससे माता-पिता के न रहने पर भी बच्चे की देखभाल जारी रहे।

  • Fixed Deposit, Mutual Funds और Child Education Plans में निवेश करें।


4. शिक्षा और थेरेपी का बजट बनाएँ

  • मासिक खर्च का हिसाब रखें।

  • निजी थेरेपी और सरकारी सहायता का संतुलन बनाएँ।


5. विशेषज्ञों से सलाह लें

  • ऐसे वित्तीय सलाहकार से मिलें जो विशेष ज़रूरत वाले परिवारों के साथ काम करते हों।

  • NGOs और पैरेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें।


Unicare Speech and Hearing Clinic का सहयोग

Unicare Speech and Hearing Clinic परिवारों की चुनौतियों को समझता है और हमेशा उनके साथ खड़ा है।

  • हम पॉकेट-फ्रेंडली थेरेपी विकल्प प्रदान करते हैं, गुणवत्ता से समझौता किए बिना।

  • हमारे सभी थेरेपिस्ट योग्य और अनुभवी हैं, जिन्होंने माता-पिता का विश्वास अर्जित किया है।

  • हम थेरेपी पैकेज की सलाह देते हैं, ताकि परिवारों को प्रति सत्र भुगतान की चिंता न हो और थेरेपी लगातार और किफ़ायती बनी रहे।

  • हमारा उद्देश्य है कि हर परिवार को सुलभ, प्रभावी और टिकाऊ थेरेपी मिले।


निष्कर्ष

भारत में ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप जीवन बदल सकता है। लेकिन इसके लिए वित्तीय योजना बनाना उतना ही ज़रूरी है। सरकारी योजनाओं, बीमा कवरेज, बचत योजनाओं और दीर्घकालिक निवेश का उपयोग करके माता-पिता अपने बच्चों को निरंतर थेरेपी दिला सकते हैं और आर्थिक स्थिरता बनाए रख सकते हैं। Unicare Speech and Hearing Clinic के साथ, परिवार निश्चिंत होकर अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।


 
 
 

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